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कथाओं का राज जो केवल सुनने वाला ही जान पाता हैं

जाने कथाओं का राज जो केवल सुनने वाला ही जान पाता हैं क्यों और कैसे

हम यहाँ आपको जो भी कुछ बताने जा रहे हैं वो हमें हमारे किसी दोस्त ने भेंजी हैं और पुरा का पुरा शोध और आज माया हुआ हैं और ये कथाओं के राज को वे पर्दा कर देता हैं और सबके सामने इसके राज को ला देता हैं जब आप इस कथा का राज जान जायेगें तब आप इस कथा को कभी भी नहीं सुनना चाहेगें और ये कथा क्यों सत्य होती हैं हम आपको ये भी यहाँ आपको बताने वाले हैं



कौन सी कथा हैं वो जो बिना सुने नहीं समझ आती हैं

आपको हम यहाँ उस कथा का नाम तो नहीं बता रहे पर आपको एक हिन्ट (Hint) अर्थात उस कथा को जानने का राज दें रहे हैं वो है जिसे लोंग अपने घर पर कराते रहते हैं ये वो वाली कथा है अब आप इसे समझ हि गये होगें की कौन सी कथा हैं वो

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कथा का गुप्त राज किया हैं

ये कथा जो अभी समझ लेंगा वो कभी भी इसे सुनने कि कोसिस नहीं करेंगा हम आपको डरा नहीं रहे हैं अभी आपक इसे यहाँ पर अभी पढ सकते हैं यहाँ कुछ नहीं होगा पर जिसने ये कथा सुनी होगी उसे इसे नहीं पढना चाहिये नहीं तो हमारी कोई जिमेदारी नहीं होगी

कथा के अन्दर कौन सी वो बात हैं जिसे केवल सुनने वाला ही जान पाता हैं

(भय,पैत्र,पात्र,माया,ब्रह्मा) ये सब उस कथा के अन्दर कि बातें हैं जिसे जानकर सुनने वाले का दिमाग फिर जाता हैं फिर वो कुछ भी उल्टा-सीधा कर सकता है ये अटल सत्य हैं

ये कथा सुन चुके वाले के मन में किया सब चलता रहता हैं

हमने आपको जो ऊपर पाँच बताई हैं वहीं बातें उसे काँटटी हैं जो कथा सुन चुका होता हैं जैसे

उदाहरण 1÷प्रभु कि माया जब छा जाति हैं तो ब्रह्मा भी कुछ नहीं कर पाते ये ख्याल सभी कथा सुनने वालें के मनमें गुज्ती रहती हैं ये आपके हस्त रेखा के विचारों को सोचने पर मजबूर करती रहती हैं

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उदाहरण 2÷इस कथा को सुनने वाला कभी भी भय से मुक्त नहीं होता बल्कि उसे और ज्यादा भय लगने लगता हैं और वो ये सोचता रहता है कि मुझे अब कोई मार भी नहीं सकता और न ही में मर सकता हुँ कभी-कभी ये सब सोचते-सोचते वो पागल तक भी हो जाता हैं और कुछ उल्टा-सीधा भी कर जाता हैं और लोंग कहते हैं की बेचारा कितना अच्छा आदमी या लडका था इसे किया हो गया किसी को कुछ पता ही नहीं चल पाता
उदाहरण 3÷जब कोई ये कथा सुनता है तो उसके साथ जो कुछ भी होता है वो किसी को भी नहीं बताता ऐसा इस लिये क्योंकि वो सोचता रहता हैं कि ये झुट हे या सही वो अपने अन्दर ही परेशान रहने लगता हैं यहाँ तक की वो मानसिक अवसाद से भी गरस्त हो जाता हैं ये बात वो अपने घर वालो को भी बताने से डरता हैं
उदाहरण 4÷इस कथा का मुख्य कार्य ये हैं की इसे सुनने वाला कभी भी ठीक रह ही नहीं सकता चाहे वो व्यक्ति कुछ भी करले क्योंकि इसे सुनकर दशरथ भी नहीं बचे थे इस कथा को सुनने वाले कि सारी खुसिया खत्म हो जाति हैं उसके जीवन में उसके लिये सबसे ज्यादा अहमियत कुछ भी नहीं रह जाता
उदाहरण 5÷ये कथा जोभी सुनता है उसे ही ये सब मेहसुस होता हैं बाकी जोभी उस कथा में मौजूद होता हैं वो समझता है की इसका फल हमे भी मिल रहा हैं पर ये सब गलत फहमी होती हैं उन लोंगो की जो नहीं समझ पाते वो किया कोई भी नहीं समझ पाता हैं ये कथा ही इस प्रकार की हैं कि कोई कुछ समझ ही नहीं पाता

इस कथा का प्रभाव किस पर पड़ता हैं

इस कथा को कोई भी सुन सकता हैं पर इसका प्रभाव उसी पर पड़ता हैं जो इसे सुनने के लिये अपने पैसे खर्च करता हैं और अपनी बरबादी अपने ही हाथों करता हैं वो कथा सुनता हैं और दर्शक देखते हैं दर्शक ये समझते है कि इसका फल हमें भी मिल रहा हैं पर ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता हैं

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